तारासेतुTarasetu
ग्रह · Graha 3 of 9

मङ्गल Maṅgala(Mars)

विवरण
स्वराशिमेष Meṣa, वृश्चिक Vṛścika
मूलत्रिकोणमेष Meṣa 0°–12°
उच्चमकर Makara 28°
नीचकर्क Karka 28°
मित्रSun, Moon, Jupiter
समVenus, Saturn
शत्रुMercury

प्रकृति

मंगल एक स्वाभाविक पापग्रह हैं — शास्त्रीय गणना में तीक्ष्ण, अग्नितत्व और तामसिक प्रकृति के — यह सैनिक और शल्यचिकित्सक की ऊर्जा है। जब इसे ईमानदार कार्य मिलता है, तो इसका घर्षण साहस, रक्षा और निर्णायक कुशलता का निर्माण करता है।

कारकत्व

मंगल शक्ति और साहस के कारक हैं — भाई-बहन, भूमि और संपत्ति, इंजीनियरिंग और शस्त्र, शल्यचिकित्सा, खेलकूद, सेनानायक, रक्त और मांसपेशियाँ, तथा तार्किक प्रेरणा। मंगल जहाँ बैठते हैं, वहाँ व्यक्ति लड़ता है, निर्माण करता है या रक्षा करता है।

स्रोतBPHS, Ch. 3BPHS, Ch. 32Phaladeepika, Ch. 8Saravali

Maṅgala mahādaśā →

भाव फल · Maṅgala बारहों भावों में

तनु भाव1वाँ भाव

Tanu Bhāva

यह एक योद्धा की काया है — ऊर्जा, स्पष्टवादिता और खेलकूद जैसी प्रवृत्ति व्यक्तित्व को परिभाषित करती है; साधना यह है कि शक्ति को नियंत्रण में रखा जाए — नियंत्रित शक्ति ही असली बल है। (यह शास्त्रीय मंगल-दोष का एक स्थान है — इस संग्रह के _meta में दिए दोष-संबंधी नोट को अवश्य देखें, और सदा इसके निवारणों सहित ही पढ़ें।)

धन भाव2वाँ भाव

Dhana Bhāva

वाणी में तीव्रता और साहसपूर्वक अर्जित धन; जिह्वा कभी-कभी काट भी सकती है। साधे जाने पर यही निर्णायक सलाह और अपनी शर्तों पर कमाने का साहस बन जाती है।

सहज भाव3वाँ भाव

Sahaja Bhāva

मंगल यहाँ अपनी स्वाभाविक भूमि — साहस के क्षेत्र — में हैं: पहल-शक्ति, तकनीकी दक्षता, प्रतिस्पर्धा और उद्यम में पराक्रम; यह स्वप्रयास से सफलता पाने का शास्त्रीय स्थान है।

बन्धु भाव4वाँ भाव

Bandhu/Sukha Bhāva

चूल्हे के नीचे की आग: संपत्ति, वाहन और पारिवारिक मामलों को लेकर एक गहरी प्रेरणा; घर की इस ऊर्जा को रचनात्मक दिशा चाहिए — नवीनीकरण, सुरक्षा, प्रशिक्षण — तभी यह नींव को सुदृढ़ करती है। (शास्त्रीय मंगल-दोष स्थान; निवारणों सहित पढ़ें।)

पुत्र भाव5वाँ भाव

Putra Bhāva

जोशीली बुद्धि: तीक्ष्ण रणनीति, खेल और सट्टे जैसी सूझबूझ, संतानों के साथ गतिशील जुड़ाव और रचनात्मक जोखिम लेने की क्षमता।

अरि भाव6वाँ भाव

Ari/Ripu Bhāva

छठे भाव में सेनापति: यह शास्त्रीय बल का स्थान है — शत्रु, ऋण और रोग यहाँ सामना किए जाते हैं और परास्त किए जाते हैं; अनुशासित परिश्रम और प्रतिस्पर्धा की असाधारण क्षमता।

युवति भाव7वाँ भाव

Yuvatī/Kalatra Bhāva

साझेदारी में ताप: मजबूत, स्वतंत्र साथियों की ओर आकर्षण और जोशीले व्यवहार; कला यह है कि टकराव को टीमवर्क में बदला जाए। (यह मुख्य मंगल-दोष स्थान है — और सबसे अधिक निवारणों से घिरा भी; इसे कभी अकेले न पढ़ें।)

रन्ध्र भाव8वाँ भाव

Randhra/Āyu Bhāva

शल्यचिकित्सक का मंगल: गहन शोध, संकट में दक्षता और परिवर्तनकारी साहस; ऊर्जा जोखिमों के प्रति सावधानी से सुरक्षित रहती है, और गहराई में जाने वाला कार्य इसका सर्वोत्तम क्षेत्र बन जाता है। (शास्त्रीय मंगल-दोष स्थान; निवारणों सहित पढ़ें।)

धर्म भाव9वाँ भाव

Dharma/Bhāgya Bhāva

धर्म-योद्धा: विश्वास की रक्षा ऊर्जा के साथ की जाती है, साहसिक यात्राएँ, गुरुओं और सिद्धांत के साथ एक जोशीला संबंध — मानो श्रद्धा में बल जुड़ गया हो।

कर्म भाव10वाँ भाव

Karma Bhāva

दिग्बल — मंगल का दिशा-बल: यहाँ महत्वाकांक्षा साकार होती है; नेतृत्व की भूमिकाएँ, इंजीनियरिंग, खेलकूद और उद्यम शुद्ध परिश्रम से फलते-फूलते हैं।

लाभ भाव11वाँ भाव

Lābha Bhāva

अर्जित लाभ: ऊर्जावान संपर्क-जाल, साहसिक उद्यमों और प्रतिस्पर्धा से आय; महत्वाकांक्षी मित्र और लक्ष्य जो निरंतर प्रयास के आगे झुक जाते हैं।

व्यय भाव12वाँ भाव

Vyaya Bhāva

छिपी हुई अग्नि: विदेश-यात्रा, आश्रम, अस्पताल और पर्दे के पीछे के कार्यों के लिए ऊर्जा; यदि अभिव्यक्त न हो तो यह बेचैनी देती है — पर अनुशासन (साधना, सेवा, प्रशिक्षण) मिलने पर यही मुक्ति का मार्ग बन जाती है। (शास्त्रीय मंगल-दोष स्थान; निवारणों सहित पढ़ें।)

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण