तारासेतुTarasetu
ग्रह · Graha 2 of 9

चन्द्र Candra(Moon)

विवरण
स्वराशिकर्क Karka
मूलत्रिकोणवृषभ Vṛṣabha 3°–30° (beyond the 3° exaltation arc)
उच्चवृषभ Vṛṣabha 3°
नीचवृश्चिक Vṛścika 3°
मित्रSun, Mercury
समMars, Jupiter, Venus, Saturn
शत्रु

प्रकृति

शुक्ल पक्ष में और प्रकाशमान होने पर चंद्रमा शुभ फल देने वाला होता है; कृष्ण पक्ष का चंद्रमा शास्त्रीय गणना में हल्का अशुभ माना जाता है — पर यह भाग्य का नहीं, भावनात्मक पूर्णता का विषय है। यह सात्विक, जलतत्व प्रधान, सबसे तेज़ गति वाला और सबसे व्यक्तिगत ग्रह है।

कारकत्व

चंद्रमा मन (मानस) का कारक है: भावनाएँ, माता, पोषण, जनसाधारण और लोकप्रियता, शरीर के तरल पदार्थ, प्रजनन क्षमता, बायीं आँख और स्मृति। ज्योतिष में जन्मकुंडली को लग्न के साथ-साथ चंद्रमा से भी देखा जाता है — मन उतना ही केंद्रीय है।

स्रोतBPHS, Ch. 3BPHS, Ch. 32Phaladeepika, Ch. 8Saravali

Candra mahādaśā →

भाव फल · Candra बारहों भावों में

तनु भाव1वाँ भाव

Tanu Bhāva

चेहरे पर बसा हुआ हृदय: भावनात्मक उपस्थिति, लोकप्रियता और संवेदनशील, बदलता हुआ स्वभाव; आकर्षण सहज है, स्थिरता अभ्यास से आती है।

धन भाव2वाँ भाव

Dhana Bhāva

पोषण देने वाली वाणी और घटता-बढ़ता पर बार-बार लौटने वाला धन; भोजन और परिवार के प्रति गहरी सहज भावना। स्वयं की आवाज़ भी एक संपत्ति बन सकती है।

सहज भाव3वाँ भाव

Sahaja Bhāva

जिज्ञासु और संवादप्रिय मन: भावनात्मक साहस करने से बढ़ता है; भाई-बहनों से आत्मीय संबंध और छोटी यात्राओं तथा लेखन के प्रति रुचि।

बन्धु भाव4वाँ भाव

Bandhu/Sukha Bhāva

चंद्रमा यहाँ अपने घर में बलवान है: माँ, मातृभूमि, वाहनों और घरेलू सुख से गहरा जुड़ाव; यह पूरी कुंडली की भावनात्मक नींव है।

पुत्र भाव5वाँ भाव

Putra Bhāva

रचनात्मक, प्रेममय मन: बुद्धि में कल्पना का रंग, संतानों से प्रेम, अध्ययन तथा भक्ति या कला से जुड़ी सृजनात्मकता का आनंद।

अरि भाव6वाँ भाव

Ari/Ripu Bhāva

सेवा में देखभाल करने वाला मन: काम और उपचार में भावनात्मक निवेश; मन को पोषण देने वाली दिनचर्या चाहिए — यहाँ आत्म-देखभाल विलासिता नहीं, सिद्धांत है।

युवति भाव7वाँ भाव

Yuvatī/Kalatra Bhāva

साथ खोजने वाला मन: संबंध और जनसाधारण के माध्यम से भावनात्मक पूर्णता की तलाश; व्यवहार में लोकप्रियता, साथ ही स्थिर आंतरिक आधार सीखने का पाठ।

रन्ध्र भाव8वाँ भाव

Randhra/Āyu Bhāva

गहरा, अंतर्ज्ञानी चंद्रमा: सहज बोध, शोध की प्रवृत्ति और अदृश्य के प्रति संवेदनशीलता; शास्त्र भावनात्मक सुरक्षा की सलाह देते हैं — जब मन को स्थिर होना आ जाए, तो यह गहराई ही वरदान बन जाती है।

धर्म भाव9वाँ भाव

Dharma/Bhāgya Bhāva

श्रद्धावान मन: आस्था, दर्शन, शुभ यात्राएँ और माता तथा गुरुजनों से आशीर्वाद; भावनात्मक जीवन अर्थ और उद्देश्य के इर्द-गिर्द संगठित होता है।

कर्म भाव10वाँ भाव

Karma Bhāva

जनसाधारण का चंद्रमा: कर्मक्षेत्र जो बहुत से लोगों को छूता है — देखभाल, भोजन, व्यापार, भीड़; प्रतिष्ठा तब बढ़ती है जब जनता की आवश्यकताओं के प्रति सच्ची संवेदनशीलता हो।

लाभ भाव11वाँ भाव

Lābha Bhāva

संपर्कों और लोकप्रियता से लाभ: कई मित्रताएँ, घटती-बढ़ती पर वास्तविक आय के स्रोत, और इच्छाएँ जो समुदाय के माध्यम से फलित होती हैं।

व्यय भाव12वाँ भाव

Vyaya Bhāva

चिंतनशील चंद्रमा: समृद्ध आंतरिक जीवन, कल्पनाशीलता, विदेश-निवास और एकांत की खोज; नींद, विश्राम और आध्यात्मिक साधना ही इसकी औषधि है।

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण