पहला व्यक्ति (कन्या पक्ष): रोहिणी Rohiṇī · दूसरा व्यक्ति (वर पक्ष): चित्रा Citrā
शास्त्रीय तालिकाएँ कन्या पक्ष से वर पक्ष की ओर पढ़ी जाती हैं — क्रम का बस यही कारण है।
सामान्य गुण मिलान अंक
20/ 36
18-20.5: शास्त्रीय न्यूनतम पूरा है। आगे कुछ भी पढ़ने से पहले तालिका कम कूटों और दोष-परिहारों पर ध्यान माँगती है।
पद-भेद · पद के अनुसार अंक में बदलाव
कम-से-कम एक नक्षत्र राशि की सीमा पर है, इसलिए ठीक पद के अनुसार राशि बदल जाती है और कुल अंक 19 से 20 तक जाता है। नीचे हर 4×4 पद-संयोजन का वास्तविक अंक है — इसीलिए एक ही अंक नहीं दिखाया गया।
पद के अनुसार अंक में बदलाव
व्यक्ति 1 का पद
व्यक्ति 2 का पद → 1
व्यक्ति 2 का पद → 2
व्यक्ति 2 का पद → 3
व्यक्ति 2 का पद → 4
1
20
20
19
19
2
20
20
19
19
3
20
20
19
19
4
20
20
19
19
मोटा अंक = सबसे सामान्य मान
अष्टकूट · आठ कूट का विवरण
आठ कूट का विवरण
कूट
व्यक्ति 1
व्यक्ति 2
अंक
क्या मापता है
वर्णVarṇa
Vaishya
Vaishya
1/1
चंद्र राशि के तत्व से बना स्वभाव-वर्ग का एक अंक — आज इसे अहं और कार्यशैली के तालमेल के रूप में पढ़ा जाता है, सामाजिक जाति के रूप में कभी नहीं।
वश्यVaśya
Chatushpada
Manava
1/2
आपसी खिंचाव और प्रभाव के दो अंक: कौन किसे सहज ही अपनी ओर खींचता है, और नियंत्रण की डोर दोनों के बीच कितनी बराबर है।
ताराTārā
Parama_mitra
Sampat
3/3
दोनों जन्म नक्षत्रों के परस्पर 'तारा-बल' के तीन अंक: हर नक्षत्र दूसरे से गिनकर नौ ताराओं के चक्र में पढ़ा जाता है — साझा कल्याण और एक-दूसरे के भाग्य-स्वास्थ्य पर प्रभाव के रूप में।
योनिYoni
Sarpa
Vyaghra
2/4
सहज, शारीरिक और अंतरंग तालमेल के चार अंक — हर जन्म नक्षत्र के पशु-प्रतीक से; चौदह योनियाँ समता, मित्रता, तटस्थता और वैर के संबंधों में।
ग्रह मैत्रीGraha Maitrī
Venus
Mercury
5/5
मानसिक और भावनात्मक तालमेल के पाँच अंक: दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की नैसर्गिक मैत्री — जब कोई प्रयास नहीं कर रहा होता, तब दोनों मन कैसे जुड़ते हैं।
गणGaṇa
Manushya
Rakshasa
0/6
स्वभाव के छह अंक: हर जन्म नक्षत्र देव (सामंजस्यप्रिय), मनुष्य (व्यावहारिक) या राक्षस (तीव्र, मुखर) गण का है — ये ऊर्जा-शैली के नाम हैं, नैतिक निर्णय नहीं।
भकूटBhakūṭa
Vṛṣabha
Kanyā
0/7
जोड़े के रोज़मर्रा भावनात्मक मौसम के सात अंक: दोनों चंद्र राशियों की परस्पर दूरी — साझा विकास, समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य के लिए पढ़ी जाती है।
नाड़ीNāḍī
Antya
Madhya
8/8
आठ अंक — सबसे भारी कूट — शारीरिक प्रकृति के तालमेल के: हर नक्षत्र आदि (वात), मध्य (पित्त) या अंत्य (कफ) नाड़ी का है, जिसे परंपरा स्वास्थ्य और संतान से जोड़ती है।
चंद्र राशियाँ 2/12, 5/9 या 6/8 संबंध में हों: भकूट के सातों अंक एक साथ शून्य हो जाते हैं — इसीलिए काग़ज़ पर यह दोष उससे बुरा दिखता है जितना परंपरा वास्तव में इसे मानती है।
उपस्थित — पर शास्त्रीय परिहार से कटा हुआ:
दोनों राशि-स्वामी नैसर्गिक परस्पर मित्र हों (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 3): व्यापक रूप से लागू परिहार — वही मैत्री जो ग्रह मैत्री में ऊँचे अंक देती है।
Muhūrta CintāmaṇiMuhurta traditionBPHS, Ch. 3
सीमा · यह पेज क्या नहीं दिखाता
यह केवल नक्षत्र-आधारित तुलना है — इसमें कभी जन्म समय, लग्न या मंगल की स्थिति नहीं थी, इसलिए मंगल (कुज) दोष यहाँ नहीं दिखाया जा सकता (उसके लिए पूरी कुंडली से मंगल चाहिए)। पूरा ज्योतिष-पाठ हमेशा पूरी कुंडली तौलता है, सिर्फ़ दो चंद्रमा नहीं — यह परंपरा का अपना मानक है, हमारा कोई शॉर्टकट नहीं।
क्या रोहिणी और चित्रा नक्षत्र विवाह के लिए अच्छी जोड़ी है?
इनका सामान्य गुण मिलान अंक 20/36 है — 18-20.5: शास्त्रीय न्यूनतम पूरा है। आगे कुछ भी पढ़ने से पहले तालिका कम कूटों और दोष-परिहारों पर ध्यान माँगती है। शास्त्रीय तालिका में यह अंक कई कसौटियों में से एक है; पूरी कुंडलियाँ, दशाएँ और नीचे बताए गए दोष-परिहार भी उतने ही मायने रखते हैं।
अगर नाड़ी या भकूट दोष हो तो?
शास्त्र दोष के साथ उसके परिहार भी परिभाषित करते हैं — नीचे "दोष" खंड में देखें कि इस जोड़ी के लिए कौन-से परिहार लागू होते हैं। परिहार लागू हो तो दोष शास्त्रतः कट जाता है; न हो तो भी यह किसी व्यक्ति की खोट नहीं, बस सजगता का क्षेत्र है — कोई शास्त्र इससे विवाह पर रोक नहीं लगाता।
क्या अंक रोहिणी या चित्रा के पद के अनुसार बदलता है?
हाँ — इनमें से कम-से-कम एक नक्षत्र राशि की सीमा पर है, इसलिए ठीक पद के अनुसार कुल अंक 19 से 20/36 तक जाता है। सबसे सामान्य मान 20/36 है, पर सटीक जन्म-कुंडली से ही असली मान पता चलता है — ऊपर पद-सारणी देखें।
रोहिणी और चित्रा के लिए मंगल दोष का क्या?
यह केवल नक्षत्र-आधारित तुलना है — इसमें कभी जन्म समय, लग्न या मंगल की स्थिति नहीं थी, इसलिए मंगल (कुज) दोष यहाँ नहीं दिखाया जा सकता (उसके लिए पूरी कुंडली से मंगल चाहिए)। पूरा ज्योतिष-पाठ हमेशा पूरी कुंडली तौलता है, सिर्फ़ दो चंद्रमा नहीं — यह परंपरा का अपना मानक है, हमारा कोई शॉर्टकट नहीं।
प्रमाण
Muhūrta CintāmaṇiRama Daivajna, Muhurta Chintamani (c. 16th c. CE), Vivaha Prakarana: the classical systematization of the eight kootas (varna, vashya, tara, yoni, graha maitri, gana, bhakoot, nadi), their point values and the dosha exceptions. Sanskrit classic, public domain; all prose here is original synthesis.
Muhurta traditionCommon muhurta/vivaha doctrine shared across the classical muhurta manuals (Muhurta Chintamani, Muhurta Martanda, regional panchanga practice) and standardized in modern Jyotish teaching, where a rule is common property rather than attributable to a single shloka — including the koota point matrices as implemented by the major public calculators, against which our engine is validated.
BPHS, Ch. 3Brihat Parashara Hora Shastra (attrib. Maharshi Parashara), Ch. 3 'Graha Characters and Description' (97-chapter recension, R. Santhanam ed.): the natural planetary friendships (naisargika maitri) that drive Graha Maitri koota and the lord-friendship cancellations of Nadi and Bhakoot doshas.