तारासेतुTarasetu
नक्षत्र · Nakshatra 4 of 27 · 10°00′–23°20′ Vṛṣabha

रोहिणी Rohiṇī(Rohini)

विवरण

विवरण
विस्तार10°00′–23°20′ Vṛṣabha
स्वामीचन्द्र Candra
देवताप्रजापति (ब्रह्मा), सृष्टि के अधिष्ठाता
प्रतीकएक बैलगाड़ी या रथ; लाल तारा एल्डेबरन
गणmanushya
स्वभावस्थिर और उर्वर (ध्रुव) — वह स्थायी वृद्धि जो जड़ पकड़ती और फलती-फूलती है।

रोहिणी, यानी 'बढ़ने वाली', चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है — यहाँ उर्वरता, सौंदर्य, आकर्षण और भौतिक समृद्धि फलती-फूलती है। इस नक्षत्र के जातक चीज़ों को पनपाते हैं — बगीचे, परिवार, व्यवसाय, कला — और दूसरों को चुम्बक की तरह अपनी ओर खींचते हैं; इनका सबक है इस आकर्षण को बिना अधिकार-भाव के, हल्के हाथों से थामना।

स्रोतTaittirīya Brāhmaṇa 1.5BPHS, Chs. 46–49BPHS, Ch. 6Nakshatra tradition

पद · चारों पद (चरण)
चारों पद (चरण)
पद (चरण)फल (नवांश के अनुसार)
1मेष नवांश (मंगल): बगीचे में महत्वाकांक्षा जागती है — निर्माण और वृद्धि की दिशा में लगाई गई पहलक़दमी।
2वृषभ नवांश (शुक्र): वर्गोत्तम और परिपूर्ण — सौंदर्य, रुचि और समृद्धि की सबसे संपूर्ण रोहिणी अभिव्यक्ति।
3मिथुन नवांश (बुध): मोहक संवादकर्ता — व्यापार, कला और ऐसे शब्द जो मन मोह लें।
4कर्क नवांश (चंद्रमा): गहरा पोषण — घर, भोजन और परिवार मानो एक रचनात्मक कृति हों।
रोहिणी नक्षत्र के लिए शिशु नाम — नामकरण की परंपरागत ध्वनियाँ →
मिलान · रोहिणी का 27 नक्षत्रों से मिलान

रोहिणी का 27 नक्षत्रों से मिलान

कन्या का नक्षत्र रोहिणी; वर का नक्षत्र नीचे। उल्टे क्रम में अंक अलग हो सकता है। सामान्य गुण मिलान अंक, 36 में से।

प्रश्नोत्तर · अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन है?
रोहिणी का स्वामी चन्द्र (Candra) है। यह 27 में से 4वाँ नक्षत्र है, सिडेरियल राशिचक्र में 10°00′–23°20′ Vṛṣabha तक।
रोहिणी नक्षत्र के देवता और प्रतीक क्या हैं?
देवता: प्रजापति (ब्रह्मा), सृष्टि के अधिष्ठाता। प्रतीक: एक बैलगाड़ी या रथ; लाल तारा एल्डेबरन।
रोहिणी नक्षत्र का गण क्या है?
रोहिणी manushya गण का नक्षत्र है। स्वभाव: स्थिर और उर्वर (ध्रुव) — वह स्थायी वृद्धि जो जड़ पकड़ती और फलती-फूलती है।।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे शिशु के नाम की ध्वनियाँ क्या हैं?
नामकरण की परंपरागत तालिका के अनुसार, पद 1-4 की नाम-ध्वनियाँ: ओ (O), वा (Va), वी (Vi), वु (Vu)। सटीक पद जन्म कुंडली से मिलता है।

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण