तारासेतुTarasetu
ग्रह · Graha 6 of 9

शुक्र Śukra(Venus)

विवरण
स्वराशिवृषभ Vṛṣabha, तुला Tulā
मूलत्रिकोणतुला Tulā 0°–15°
उच्चमीन Mīna 27°
नीचकन्या Kanyā 27°
मित्रMercury, Saturn
समMars, Jupiter
शत्रुSun, Moon

प्रकृति

लघु (पर उदार) शुभ ग्रह: राजसिक, जलतत्व से जुड़ा दीप्तिमान, असुरों के गुरु — सांसारिक बुद्धि, कला और भोग-विलास का शास्त्र। परिष्कार (निखार) ही इसकी कार्यशैली है।

कारकत्व

इच्छा और संबंधों के कारक: प्रेम और विवाह, पत्नी (पुरुष की कुंडली में, शास्त्रीय परंपरा के अनुसार), सौंदर्य, कला-संगीत, विलासिता, वाहन, कूटनीति, प्रजनन-सामर्थ्य, शक्कर और फूल। शुक्र जहाँ बैठते हैं, वहाँ जीवन मीठा हो जाता है और रुचि-बोध माँगता है।

स्रोतBPHS, Ch. 3BPHS, Ch. 32Phaladeepika, Ch. 8Saravali

Śukra mahādaśā →

भाव फल · Śukra बारहों भावों में

तनु भाव1वाँ भाव

Tanu Bhāva

साक्षात कृपा: आकर्षण, सौंदर्य और सहज सामाजिक व्यवहार द्वार खोल देते हैं; शास्त्रों के अनुसार एक कलात्मक स्वभाव और परिष्कृत सुखों से भरी दीर्घ आयु मिलती है।

धन भाव2वाँ भाव

Dhana Bhāva

मधुरभाषी कोषाध्यक्ष: कला, विलासिता के व्यवसायों और कूटनीति से धन मिलता है; मधुर वाणी, अच्छा भोजन और सुंदर पारिवारिक संस्कृति साथ चलती है।

सहज भाव3वाँ भाव

Sahaja Bhāva

क्रिया में कला: रचनात्मक कुशलता, आकर्षक संवाद-शैली और भाई-बहनों के साथ सुखद संबंध; साहस बल के रूप में नहीं, बल्कि शैली और अंदाज़ के रूप में प्रकट होता है।

बन्धु भाव4वाँ भाव

Bandhu/Sukha Bhāva

दिग्बल — शुक्र की दिशात्मक शक्ति: घरेलू सुख, सुंदर घर और वाहन, माँ जैसी मिठास; आराम मानो एक सच्ची प्रतिभा बन जाता है।

पुत्र भाव5वाँ भाव

Putra Bhāva

रोमांटिक कलाकार: रचनात्मकता, हृदय के प्रेम-प्रसंग, संतान और ललित कलाओं में आनंद; जब रुचि-बोध मार्गदर्शक हो तो सट्टे/निवेश में भी अनुकूलता।

अरि भाव6वाँ भाव

Ari/Ripu Bhāva

सेवा में परिष्कार: कला का प्रयोग काम और उपचार में; संघर्षों में सामंजस्य लाना। संयमित भोग — यानी 'स्वस्थ सुखवादी' बनना — यही सफलता का सूत्र है।

युवति भाव7वाँ भाव

Yuvatī/Kalatra Bhāva

शुक्र अपने स्वाभाविक भाव में: समर्पित साथी और साझेदारी की स्वयं में एक कला-सी क्षमता; विवाह, कूटनीति और सार्वजनिक व्यवहार सच्चे परस्पर आनंद से फलते-फूलते हैं।

रन्ध्र भाव8वाँ भाव

Randhra/Āyu Bhāva

इच्छा की गहराई: चुंबकीय आकर्षण, विरासत और साथी के संसाधनों से मिलने वाला आराम, तथा जीवन के रहस्यों में रुचि; आवेग गहन आत्मीयता में परिपक्व होता है।

धर्म भाव9वाँ भाव

Dharma/Bhāgya Bhāva

धर्म का सौंदर्यप्रेमी: कला से भाग्योदय, कृपालु गुरु और सुंदर यात्राएँ; दर्शन को रेशम की तरह हल्केपन से धारण करना।

कर्म भाव10वाँ भाव

Karma Bhāva

सौंदर्य में करियर: कला, मनोरंजन, विलासिता, कूटनीति और परामर्श में उन्नति; एक सार्वजनिक छवि जिसे लोग बस पसंद करते हैं — आकर्षण से बढ़ती प्रतिष्ठा।

लाभ भाव11वाँ भाव

Lābha Bhāva

कृपा से लाभ: लाभदायक रचनात्मक उपक्रम, समृद्ध और कलात्मक संगत, पसंदीदगी और रुचि-बोध से इच्छाओं की पूर्ति।

व्यय भाव12वाँ भाव

Vyaya Bhāva

शय्या-सुखों और धन्य एकांत का शास्त्रीय स्थान: निजता में आनंद, विदेश में भाग्योदय, एकांत में रचित कला; इच्छा भक्ति की ओर परिष्कृत होती है — यह शुक्र का सर्वोच्च स्वर है।

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण