तारासेतुTarasetu
ग्रह · Graha 5 of 9

बृहस्पति Bṛhaspati(Jupiter)

विवरण
स्वराशिधनु Dhanu, मीन Mīna
मूलत्रिकोणधनु Dhanu 0°–10°
उच्चकर्क Karka 5°
नीचमकर Makara 5°
मित्रSun, Moon, Mars
समSaturn
शत्रुMercury, Venus

प्रकृति

बृहत् शुभग्रह (गुरु): विस्तार देने वाला, सात्विक, देवताओं का गुरु। शास्त्रों का कहना है कि गुरु जहाँ भी दृष्टि डालते हैं, वहाँ स्थितियाँ सुधरने लगती हैं — इनकी दृष्टियों को आशीर्वाद के रूप में गिना जाता है।

कारकत्व

ज्ञान और सुख के कारक: बुद्धि, गुरु-शिक्षक, संतान, धन-सम्पन्नता, धर्म और नियम, तथा स्त्री की कुंडली में पति (शास्त्रीय परंपरा के अनुसार), यकृत, उदारता और श्रद्धा। जहाँ गुरु स्थित होते हैं, वहाँ जीवन विस्तृत होता है और अर्थ की खोज शुरू होती है।

स्रोतBPHS, Ch. 3BPHS, Ch. 32Phaladeepika, Ch. 8Saravali

Bṛhaspati mahādaśā →

भाव फल · Bṛhaspati बारहों भावों में

तनु भाव1वाँ भाव

Tanu Bhāva

दिग्बल — गुरु का दिशाबल: यहाँ बुद्धि, आशावाद और नैतिक उपस्थिति व्यक्ति की पहचान बन जाती है; शास्त्र सम्मान, विद्या और एक कल्याणकारी जीवन-यात्रा का वचन देते हैं।

धन भाव2वाँ भाव

Dhana Bhāva

आशीर्वाद-प्राप्त कोष: धन, परिष्कृत वाणी और विरासत में मिलने योग्य मूल्य-व्यवस्था; उदारता और विद्या से परिवार का जीवन समृद्ध होता है।

सहज भाव3वाँ भाव

Sahaja Bhāva

प्रयास में बुद्धिमत्ता: नैतिकता द्वारा निर्देशित साहस, भाग्यशाली भाई-बहन, लेखन और मीडिया के माध्यम से शिक्षण; ऐसी पहलक़दमी जो जीतने के बजाय उन्नति देती है।

बन्धु भाव4वाँ भाव

Bandhu/Sukha Bhāva

सुखी गृहस्थी: घर में संतोष, संपत्ति, वाहन और माता का आशीर्वाद; शिक्षा में उन्नति होती है; भीतरी जीवन कृतज्ञता से सजा हुआ होता है।

पुत्र भाव5वाँ भाव

Putra Bhāva

पूर्वपुण्य का यह भाव अपने कारक का स्वागत करता है: बुद्धि, संतान, मंत्र और पूर्वजन्म के शुभ कर्मों का फल; परामर्शदाताओं और शिक्षकों का एक शास्त्रीय स्थान।

अरि भाव6वाँ भाव

Ari/Ripu Bhāva

सेवा में कृपा: चिकित्सा से जुड़े व्यवसाय, उदार नियोक्ता, विवादों में सुरक्षा; बाधाएँ धैर्यपूर्ण बुद्धि के आगे सिमट जाती हैं — हालाँकि स्वास्थ्य-दिनचर्या के मामलों में अति-विस्तार पर थोड़ा ध्यान रखना उचित है।

युवति भाव7वाँ भाव

Yuvatī/Kalatra Bhāva

आशीर्वाद-प्राप्त संबंध: एक समझदार, सिद्धांतवान साथी और भाग्यशाली साझेदारियाँ; विवाह और सार्वजनिक व्यवहार के माध्यम से उन्नति, जहाँ परामर्श ही बंधन की नींव बनता है।

रन्ध्र भाव8वाँ भाव

Randhra/Āyu Bhāva

गहराइयों में बुद्धिमत्ता: विरासत, जीवन के रहस्यों की समझ और संकट के समय सुरक्षा — यह वह शास्त्रीय स्थिति है जिसे 'दीर्घायु' कहा जाता है; रूपांतरण एक शिक्षक बनकर आता है, चोर बनकर नहीं।

धर्म भाव9वाँ भाव

Dharma/Bhāgya Bhāva

धर्म में सिंहासित गुरु: भाग्य, श्रद्धा, गुरु-शिक्षक और दूर के क्षितिज सब मिलकर संरेखित होते हैं; यह संपूर्ण प्रणाली की सबसे शुभ स्थितियों में से एक है — यह भाग्य अपने सिद्धांतों पर जीने से अर्जित होता है।

कर्म भाव10वाँ भाव

Karma Bhāva

सम्मानित पेशेवर: शिक्षण, कानून, परामर्श या नैतिक भार वाले नेतृत्व में करियर; प्रतिष्ठा उसी तरह बढ़ती है जैसे सुविचारित विश्वास ब्याज सहित लौटता है।

लाभ भाव11वाँ भाव

Lābha Bhāva

लाभ के इस भाव में बृहत् शुभग्रह का निवास: प्रचुर आय, सिद्धांतवान संबंध-नेटवर्क, बड़े-बुजुर्ग मार्गदर्शक, और ऐसी महत्वाकांक्षाएँ जो एक साथ कई लोगों को ऊपर उठाती हैं।

व्यय भाव12वाँ भाव

Vyaya Bhāva

साधक का गुरु: दान में उदारता, आध्यात्मिक अभ्यास में शरण, विदेश और परमार्थ के क्षेत्रों में भाग्य; यहाँ व्यय स्वयं कृपा का एक रूप बन जाता है।

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण