पहला व्यक्ति (कन्या पक्ष): मूल Mūla · दूसरा व्यक्ति (वर पक्ष): कृत्तिका Kṛttikā
शास्त्रीय तालिकाएँ कन्या पक्ष से वर पक्ष की ओर पढ़ी जाती हैं — क्रम का बस यही कारण है।
सामान्य गुण मिलान अंक
18/ 36
18-20.5: शास्त्रीय न्यूनतम पूरा है। आगे कुछ भी पढ़ने से पहले तालिका कम कूटों और दोष-परिहारों पर ध्यान माँगती है।
पद-भेद · पद के अनुसार अंक में बदलाव
कम-से-कम एक नक्षत्र राशि की सीमा पर है, इसलिए ठीक पद के अनुसार राशि बदल जाती है और कुल अंक 18 से 23.5 तक जाता है। नीचे हर 4×4 पद-संयोजन का वास्तविक अंक है — इसीलिए एक ही अंक नहीं दिखाया गया।
पद के अनुसार अंक में बदलाव
व्यक्ति 1 का पद
व्यक्ति 2 का पद → 1
व्यक्ति 2 का पद → 2
व्यक्ति 2 का पद → 3
व्यक्ति 2 का पद → 4
1
23.5
18
18
18
2
23.5
18
18
18
3
23.5
18
18
18
4
23.5
18
18
18
मोटा अंक = सबसे सामान्य मान
अष्टकूट · आठ कूट का विवरण
आठ कूट का विवरण
कूट
व्यक्ति 1
व्यक्ति 2
अंक
क्या मापता है
वर्णVarṇa
Kshatriya
Vaishya
0/1
चंद्र राशि के तत्व से बना स्वभाव-वर्ग का एक अंक — आज इसे अहं और कार्यशैली के तालमेल के रूप में पढ़ा जाता है, सामाजिक जाति के रूप में कभी नहीं।
वश्यVaśya
Manava
Chatushpada
1/2
आपसी खिंचाव और प्रभाव के दो अंक: कौन किसे सहज ही अपनी ओर खींचता है, और नियंत्रण की डोर दोनों के बीच कितनी बराबर है।
ताराTārā
Mitra
Vipat
1.5/3
दोनों जन्म नक्षत्रों के परस्पर 'तारा-बल' के तीन अंक: हर नक्षत्र दूसरे से गिनकर नौ ताराओं के चक्र में पढ़ा जाता है — साझा कल्याण और एक-दूसरे के भाग्य-स्वास्थ्य पर प्रभाव के रूप में।
योनिYoni
Shvan
Mesha
1/4
सहज, शारीरिक और अंतरंग तालमेल के चार अंक — हर जन्म नक्षत्र के पशु-प्रतीक से; चौदह योनियाँ समता, मित्रता, तटस्थता और वैर के संबंधों में।
ग्रह मैत्रीGraha Maitrī
Jupiter
Venus
0.5/5
मानसिक और भावनात्मक तालमेल के पाँच अंक: दोनों चंद्र राशियों के स्वामियों की नैसर्गिक मैत्री — जब कोई प्रयास नहीं कर रहा होता, तब दोनों मन कैसे जुड़ते हैं।
गणGaṇa
Rakshasa
Rakshasa
6/6
स्वभाव के छह अंक: हर जन्म नक्षत्र देव (सामंजस्यप्रिय), मनुष्य (व्यावहारिक) या राक्षस (तीव्र, मुखर) गण का है — ये ऊर्जा-शैली के नाम हैं, नैतिक निर्णय नहीं।
भकूटBhakūṭa
Dhanu
Vṛṣabha
0/7
जोड़े के रोज़मर्रा भावनात्मक मौसम के सात अंक: दोनों चंद्र राशियों की परस्पर दूरी — साझा विकास, समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य के लिए पढ़ी जाती है।
नाड़ीNāḍī
Adi
Antya
8/8
आठ अंक — सबसे भारी कूट — शारीरिक प्रकृति के तालमेल के: हर नक्षत्र आदि (वात), मध्य (पित्त) या अंत्य (कफ) नाड़ी का है, जिसे परंपरा स्वास्थ्य और संतान से जोड़ती है।
चंद्र राशियाँ 2/12, 5/9 या 6/8 संबंध में हों: भकूट के सातों अंक एक साथ शून्य हो जाते हैं — इसीलिए काग़ज़ पर यह दोष उससे बुरा दिखता है जितना परंपरा वास्तव में इसे मानती है।
उपस्थित है, और इन कुंडलियों में कोई शास्त्रीय परिहार लागू नहीं होता। परंपरा इसे सजगता का क्षेत्र पढ़ती है — फ़ैसला कभी नहीं।
Muhūrta CintāmaṇiMuhurta traditionBPHS, Ch. 3
सीमा · यह पेज क्या नहीं दिखाता
यह केवल नक्षत्र-आधारित तुलना है — इसमें कभी जन्म समय, लग्न या मंगल की स्थिति नहीं थी, इसलिए मंगल (कुज) दोष यहाँ नहीं दिखाया जा सकता (उसके लिए पूरी कुंडली से मंगल चाहिए)। पूरा ज्योतिष-पाठ हमेशा पूरी कुंडली तौलता है, सिर्फ़ दो चंद्रमा नहीं — यह परंपरा का अपना मानक है, हमारा कोई शॉर्टकट नहीं।
क्या मूल और कृत्तिका नक्षत्र विवाह के लिए अच्छी जोड़ी है?
इनका सामान्य गुण मिलान अंक 18/36 है — 18-20.5: शास्त्रीय न्यूनतम पूरा है। आगे कुछ भी पढ़ने से पहले तालिका कम कूटों और दोष-परिहारों पर ध्यान माँगती है। शास्त्रीय तालिका में यह अंक कई कसौटियों में से एक है; पूरी कुंडलियाँ, दशाएँ और नीचे बताए गए दोष-परिहार भी उतने ही मायने रखते हैं।
अगर नाड़ी या भकूट दोष हो तो?
शास्त्र दोष के साथ उसके परिहार भी परिभाषित करते हैं — नीचे "दोष" खंड में देखें कि इस जोड़ी के लिए कौन-से परिहार लागू होते हैं। परिहार लागू हो तो दोष शास्त्रतः कट जाता है; न हो तो भी यह किसी व्यक्ति की खोट नहीं, बस सजगता का क्षेत्र है — कोई शास्त्र इससे विवाह पर रोक नहीं लगाता।
क्या अंक मूल या कृत्तिका के पद के अनुसार बदलता है?
हाँ — इनमें से कम-से-कम एक नक्षत्र राशि की सीमा पर है, इसलिए ठीक पद के अनुसार कुल अंक 18 से 23.5/36 तक जाता है। सबसे सामान्य मान 18/36 है, पर सटीक जन्म-कुंडली से ही असली मान पता चलता है — ऊपर पद-सारणी देखें।
मूल और कृत्तिका के लिए मंगल दोष का क्या?
यह केवल नक्षत्र-आधारित तुलना है — इसमें कभी जन्म समय, लग्न या मंगल की स्थिति नहीं थी, इसलिए मंगल (कुज) दोष यहाँ नहीं दिखाया जा सकता (उसके लिए पूरी कुंडली से मंगल चाहिए)। पूरा ज्योतिष-पाठ हमेशा पूरी कुंडली तौलता है, सिर्फ़ दो चंद्रमा नहीं — यह परंपरा का अपना मानक है, हमारा कोई शॉर्टकट नहीं।
प्रमाण
Muhūrta CintāmaṇiRama Daivajna, Muhurta Chintamani (c. 16th c. CE), Vivaha Prakarana: the classical systematization of the eight kootas (varna, vashya, tara, yoni, graha maitri, gana, bhakoot, nadi), their point values and the dosha exceptions. Sanskrit classic, public domain; all prose here is original synthesis.
Muhurta traditionCommon muhurta/vivaha doctrine shared across the classical muhurta manuals (Muhurta Chintamani, Muhurta Martanda, regional panchanga practice) and standardized in modern Jyotish teaching, where a rule is common property rather than attributable to a single shloka — including the koota point matrices as implemented by the major public calculators, against which our engine is validated.
BPHS, Ch. 3Brihat Parashara Hora Shastra (attrib. Maharshi Parashara), Ch. 3 'Graha Characters and Description' (97-chapter recension, R. Santhanam ed.): the natural planetary friendships (naisargika maitri) that drive Graha Maitri koota and the lord-friendship cancellations of Nadi and Bhakoot doshas.