तारासेतुTarasetu
नक्षत्र · Nakshatra 18 of 27 · 16°40′–30°00′ Vṛścika

ज्येष्ठा Jyeṣṭhā(Jyeshtha)

विवरण

विवरण
विस्तार16°40′–30°00′ Vṛścika
स्वामीबुध Budha
देवताइंद्र, देवताओं के प्रमुख
प्रतीकएक गोलाकार रक्षा-कवच (ताम्रधारण); एक छत्र; एक कर्णफूल
गणrakshasa
स्वभावतीव्र और श्रेष्ठ (तीक्ष्ण) — सबसे बड़े संतान का भार और उसकी प्रखर बुद्धि।

ज्येष्ठा का अर्थ है 'सबसे बड़ा': इस नक्षत्र के जातक बड़े भाई-बहन की भूमिका ढोते हैं — रक्षात्मक अधिकार, तीव्र बुद्धि, और वह जिम्मेदारी जो अक्सर तैयार होने से पहले ही आ जाती है। इनकी छाया है ऊँचे पद का अकेलापन; इनका गौरव है वह छत्र जो ये अपने संरक्षण में आए हर व्यक्ति पर थामे रहते हैं। इसकी अंतिम अंश-सीमा गंडांत की सीमा से मिलती है — एक गहन संक्रमण-क्षेत्र, जो व्यक्ति को परिपक्व बनाता है, विनाश नहीं करता।

स्रोतTaittirīya Brāhmaṇa 1.5BPHS, Chs. 46–49BPHS, Ch. 6Nakshatra tradition

पद · चारों पद
चारों पद
पदफल (नवांश के अनुसार)
1धनु नवांश (गुरु): न्यायपूर्ण ज्येष्ठ — सिद्धांतों से मार्गदर्शित रक्षात्मक शक्ति।
2मकर नवांश (शनि): उत्तरदायी प्रमुख — संरचना और सहनशक्ति के साथ निभाया गया अधिकार।
3कुंभ नवांश (शनि): अनेकों का रक्षक — समुदाय की सेवा में लगी वरिष्ठता।
4मीन नवांश (गुरु): गंडांत की सीमा पर खड़ा ज्येष्ठ — सत्ता जो ज्ञान और करुणा में समर्पित हो जाती है।

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण