तारासेतुTarasetu
नक्षत्र · Nakshatra 2 of 27 · 13°20′–26°40′ Meṣa

भरणी Bharaṇī(Bharani)

विवरण

विवरण
विस्तार13°20′–26°40′ Meṣa
स्वामीशुक्र Śukra
देवतायम — धर्म और जीवन की दहलीज़ों के अधिपति
प्रतीकयोनि — गर्भ, जन्म का द्वार
गणmanushya
स्वभावशास्त्रीय वर्गीकरण में उग्र और दुर्जय — एक ऐसी सघन ऊर्जा जो धारण करती है, पालती है और अंततः प्रसव कराती है।

भरणी का अर्थ है 'जो धारण करती है': ये जातक परियोजनाओं, लोगों और ज़िम्मेदारियों को उसी अनुशासन के साथ ढोते, गर्भ में सहेजते और अंततः पूर्ण रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो मानो स्वयं यम से सीखा गया हो। यहाँ रचनात्मक और भावनात्मक गहराई भी है, और एक दुर्लभ क्षमता है — जीवन की दहलीज़ों पर (जन्म, अंत, परिवर्तन) पूरी तरह उपस्थित रहने की, जहाँ अधिकांश लोग नज़रें फेर लेते हैं।

स्रोतTaittirīya Brāhmaṇa 1.5BPHS, Chs. 46–49BPHS, Ch. 6Nakshatra tradition

पद · चारों पद
चारों पद
पदफल (नवांश के अनुसार)
1सिंह नवांश (सूर्य): रचनात्मक अधिकार — ज़िम्मेदारी को गरिमा के साथ वहन करना।
2कन्या नवांश (बुध): सेवा और सटीकता — दाई जैसी बारीक, व्यावहारिक देखभाल।
3तुला नवांश (शुक्र): संबंधों की कलात्मकता — सौंदर्य, कूटनीति और साझेदारी के सहारे दूसरों को थामे रखना।
4वृश्चिक नवांश (मंगल): सबसे गहरी तीव्रता — चीज़ों की चरम सीमा पर होने वाला परिवर्तनकारी कार्य।

हिन्दी पाठ अंग्रेज़ी ज्ञानकोश से मशीन-अनूदित है और ज्योतिषी द्वारा समीक्षा की प्रतीक्षा में है। सिद्धांत और प्रमाण दोनों भाषाओं में एक ही हैं।

प्रमाण